भारत-मालदीव के रिश्ते तोड़ रहा चीन !

 

संदर्भ

      • चीनी फर्म सिनो सोअर हाइब्रिड टेक्नोलॉजी ने मालदीव में 12 द्वीपों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए मालदीव सरकार के साथ एक अनुबंध किया है।
      • इससे पहले चीन ने श्रीलंका के तीन द्वीपों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का फैसला किया था । जो कि भारत के लिए चिंता का विषय बन गया था, लेकिन फिर उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया ।
      • श्रीलंका ने हाल ही में कोलंबो पोर्ट (बंदरगाह) पर ईस्‍ट कंटेनर टर्मिलन के निर्माण का ठेका चीन की कंपनी को दिया है , जबकि यह ठेका पहले भारत और जापान को दिया जाना था और श्रीलंका इसके लिए प्रतिबद्ध भी था।

मालदीव की भू-रणनीतिक अवस्थिति

      • मालदीव हिन्द महासागर में सामरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण जगह पर स्थित है। वर्तमान समय में मालदीव हिन्द महासागर भारत और चीन के बीच एक उभरती प्रतिद्वंदिता का केंद्र बन रहा है। परंपरागत रूप से, हिन्द महासागर को नियंत्रित करने की इच्छा रखने वाली सभी बड़ी शक्तियों- पुर्तगाल, नीदरलैंड, ग्रेट ब्रिटेन, अमेरिका और सोवियत संघ ने मालदीव को एक सैन्य अड्डे के रूप में देखा है।
      • द्वित्तीय विश्व युद्ध के दौरान मालदीव के दक्षिणी भाग के लगभग सभी द्विपों का इस्तेमाल ब्रिटिश रॉयल नेवी अपने सैन्य अड्डे के लिए करती थी।
      • द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान का सिंगापुर और इंडोनेशिया में बढ़ते प्रभाव के कारण ब्रिटेन ने गन द्वीप पर अपनी नौसैनिक अड्डे की स्थापना की थी।
      • 1965 में मालदीव ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ ।
      • यह हमारे देश के लक्षद्वीप समूह से महज 700 किमी. दूर है।
      • मालदीव, फारस की खाड़ी, अदन की खाड़ी और मलक्का जलडरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समुद्री जलमार्गों के निकट स्थित है जिससे होकर चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे कई देशों को ऊर्जा की आपूर्ति होती है।
      • भारत का करीब 95 फीसदी अंतरराष्ट्रीय व्यापार हिन्द महासागर के द्वारा ही होता है।
      • इसलिए यह समझा जा सकता है कि इसके मार्गों को सुरक्षित करना भारत के लिए भू- आर्थिक दृष्टि से कितना महत्वपूर्ण है।
      • हिन्द महासागर क्षेत्र में 40 से ज्यादा देश और दुनिया की करीब 40 फ़ीसदी आबादी है।

भारत के लिए मालदीव का महत्व

      • भारत इस क्षेत्र का आर्थिक, रणनीतिक और सैनिक दृष्टि से मजबूत एवं भरोसेमंद देश होने के नाते क्षेत्र की शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी पर है। इसके लिए भारत को सुरक्षा और प्रतिरक्षा के क्षेत्र में मालदीव के साथ सहयोग कायम करना होगा।
      • चीन का मालदीव के साथ बढ़ता आर्थिक सहयोग भारत के लिए चिंता की बात है ।
      • इसके पहले दशकों तक मालदीव के भारत के साथ करीबी रिश्ते रहे हैं। वहां चीन का दूतावास 2011 में ही खुला है। भारत इसके काफी पहले 1972 में ही वहां अपना दूतावास खोल चुका था। इसलिए अब भारत को चीन के इस दबदबे को कम करने के लिए कोई कदम उठाना ही होगा। चीन के कर्ज जाल में श्रीलंका को फंसते देखकर मालदीव को सबक लेना चाहिए और भारत के साथ अपने रिश्तो में फिर से गति लानी चाहिए और भारत के लिए मालदीव के साथ अपने रिश्ते को सुधारने का यह एक मौका है।
      • भारत के लिए सबसे ज़्यादा चिंताजनक बात तो यह रही कि पाकिस्तानी सेना की तरफ़ से घोषणा की गई कि पाकिस्तानी युद्धपोत मालदीव के एक्सक्लूसिव इकनॉमिक ज़ोन की देखरेख करेंगे। कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस बात को मानते हैं कि मालदीव में पाकिस्तान की एंट्री चीनी हितों को साधने के लिए है।
      • मालदीव में करीब 25,000 भारतीय रहते हैं, जो दूसरा सबसे बड़ा विदेशी समुदाय है। मालदीव से भारत में भी बड़ी संख्या में वहां के नागरिक शिक्षा, उपचार और कारोबार के लिए आते हैं। भारत में उच्च शिक्षा या उपचार के लिए लॉन्ग टर्म वीजा हासिल करने वाले मालदीव के नागरिकों की संख्या दिनोदिन बढ़ रही है।

आगे की राह

      • भारत और मालदीव के बीच रक्षा सहयोग मालदीव के आस-पास वाले क्षेत्रों में संपर्क/आवागमन के महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग के साथ ही चीन की समुद्री एवं नौसैनिक गतिविधियों पर नज़र रखने के संदर्भ में भारत की क्षमता में वृद्धि करेगा।

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